कतर और सऊदी अरब में मेल-मिलाप कराने की डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की कोशिश में कामयाबी मिलती दिख रही है। बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से इ’स्रा’यल का समझौते कराने के बाद अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में ट्रंप प्रशासन कतर और सऊदी अरब के संबंधों को सामान्य बनाने में अपनी ताकत झोंकी हुई है।

राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकार जैरेड कुशनर ने अमेरिका की मध्यस्थता पहल को आगे बढ़ाया है। पहले उन्होंने सऊदी अरब में वहां के नेताओं से बातचीत की। इनमें सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान भी शामिल हैं, जिन्हें अब सऊदी अरब का वास्तविक शासक समझा जाता है। रियाद यात्रा के बाद बुधवार को कुशनर दोहा पहुंचे।

सऊदी अरब और कतर दोनों पड़ोसी देश हैं, लेकिन उनमें पिछले तीन साल से कुछ अधिक समय से टकराव चल रहा है। इसमें खाड़ी क्षेत्र के कई दूसरे देश भी उलझे हैं। अब खबर है कि दोनों देशों के बीच आरंभिक समझौते पर सहमति बन गई है। दोहा में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से बातचीत के बाद कुशनर वापस अमेरिका रवाना हो गए हैं।

अमेरिकी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक पहली सहमति इस बात पर बनाने की कोशिश की जा रही है कि कतर के विमानों को सऊदी अरब और यूएई के हवाई क्षेत्र से गुजरने दिया जाए। जून 2017 में जब खाड़ी क्षेत्र में ट’करा’व पैदा हुआ था, तब यूएई,मिस्र और बहरीन सऊदी अरब के साथ हो गए थे। इन चारों देशों ने मिलकर कतर की घे’राबं’दी कर दी थी। इन चारों देशों का आरोप था कि कतर आ’तंकवा’द की मदद कर रहा है।

कतर के ईरान के साथ अच्छे रिश्ते रहे हैं, जिसे ये चारों देश पसंद नहीं करते। ईरान पर भी इन देशों का आरो’प है कि वह इलाके में उ’ग्रवा’दी गतिविधियों को बढ़ावा देकर अ”स्थिर’ता पैदा करने में शामिल है। कतर से सऊदी खेमे के देशों की यह शि’का’यत भी कि उसके यहां से चलने वाला अल-जजीरा टीवी चैनल खाड़ी देशों की खबरें इस तरह दिखाता है, जिनसे उन्हें मु’श्कि’ल पेश आती है। 2017 में चारों देशों ने घे’राबं’दी खत्म करने के लिए 13 सूत्रीय अल्टीमेटम कतर को दिया था। इसमें अल-जजीरा चैनल को बंद करने की मांग भी की गई थी। तब से कतर ने लगातार खुद पर लगाए गए तमाम आरोपों को बेबुनियाद बताया है और बातचीत से हल निकालने की वकालत की है।