पश्चिम एशियाई देश लेबनान इन दिनों आर्थिक संकट से गुजर रहा है. हालात ये हो चुके हैं कि ब्रेड का एक पैकेट लेने के लिए भी लाइन लगानी पड़ रही है. एक साल पहले तक जो ब्रेड 1000 लेबनान पाउंड (करीब 48 रुपए) में मिलती थी, वह अब वह 6000 लेबनान पाउंड (करीब 288 रुपए) में मिल रही है. पानी की कीमतें जहां 8 गुना बढ़ गई हैं, वहीं खाना भी 6 गुना तक महंगा हो गया है. दुकान से सामन खरीदने के लएि 4 से 6 घंटे का समय लग रहा है.

सरकार के पास इतने पैसे भी नहीं बचे हैं कि वह बिजली की सप्‍लाई कर सके. सरकारी सप्‍लाई वाली बिजली 24 घंटे में एक घंटे ही हो पा रही है. कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं. बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. इन सबके बीच गुरुवार को लेबनान में नजीब मिकाती नए प्रधानमंत्री बन गए हैं. लेबनान की स्थिति तब है वह नजीब मिकाती देश के सबसे अमीर इंसान हैं.

बता दें कि बीते साल 4 अगस्त को बेरुत में एक बड़ा वि’स्‍फो’ट हुआ जिसमें 200 से अधिक लोग मा’रे गए. इस विस्‍’फोट के बाद लेबनान की सरकार गिर गई और देश में आर्थिक सं’कट बढ़ गया. देश में राजनीतिक खींचतान के चलते कोई भी दल सरकार नहीं बना सका. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जनवरी तक एक लीटर पेट्रोल की कीमत 1000 लेबनान पाउंड थी जो अब 6500 लेबनान पाउंड तक पहुंच गई है. देश की 78% आबादी गरीबी का सामना कर रही है.